Thursday 8 July 2010

लोगों के लिए गीत


आओ ! दुख और जंज़ीर के साथियों

हम चलें कुछ भी न हारने के लिए

कुछ भी न खोने के लिए

सिवा अर्थियों के


आकाश के लिए हम गाएंगे

भेजेंगे अपनी आशाएँ

कारखानों और खेतों और खदानों में

हम गाएंगे और छोड़ देंगे

अपने छिपने की जगह

हम सामना करेंगे सूरज का


हमारे दुश्मन गाते हैं--

"वे अरब हैं... क्रूर हैं..."


हाँ, हम अरब हैं

हम निर्माण करना जानते हैं

हम जानते हैं बनाना

कारखाने अस्पताल और मकान

विद्यालय, बम और मिसाईल

हम जानते हैं

कैसे लिखी जाती है सुन्दर कविता

और संगीत...

हम जानते हैं

- महमूद दरवेश

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