Friday 30 March 2012

केंद्र सरकार ले रक्षा सौदों में दलाली की जिम्मेदारी



पटना ]। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी [भाकपा] ने कहा है कि देशभक्ति की आड़ में रक्षा सौदों में दलाली बंद की जाए। हर प्रकार के रक्षा सौदों को नियंत्रक एवं महालेखाकार [कैग] के दायरे में लाया जाए।
देशभक्ति एवं सुरक्षा के नाम पर इन सौदों की कैग से जांच नहीं करायी जाती और दलाली एवं भ्रष्टाचार धड़ल्ले से जारी रहता है। इस दलाली में अभी यूरोप के कई देशों के अलावा इजरायल भी सक्रिय है। सेना प्रमुख घूस आफर किए जाने की बात कर रहे हैं। पार्टी ने 21वें महाधिवेशन में कहा कि केन्द्र सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। महाधिवेशन में रक्षा सौदे, सेना प्रमुख को रिश्वत देने के अलावा आदिवासी एवं कोल माफिया से संबंधित प्रस्ताव भी राजनीति मसौदे के रूप में पेश हुए।
पत्रकारों को संवाददाता सम्मेलन में जानकारी देते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शमीम फैजी और अतुल कुमार अंजान ने कहा कि ये राजनीतिक मसौदे 2014 के आम चुनाव में पार्टी के गाइडलाइन होंगे। केन्द्र सरकार ने बोफोर्स घोटाले, विन चड्डा प्रकरण, तहलका खुलासा [जार्ज फर्नाडीज का कार्यकाल] आदि से कोई सीख नहीं ली है। रक्षा सौदों में दलाली स्थायी आकार ले चुकी है। अब तो यूरोप के कई देशों के अलावा इजरायल भी इसमें शामिल है। यह हमेशा तर्क दिया जाता है कि देश की सुरक्षा का मामला है, इसे विवाद से न जोड़ा जाए। हथियार खरीद से लेकर रक्षा संबंधी हर सौदे की जांच 'कैग' से करायी जाए।
अतुल कुमार अंजान ने कहा कि रक्षा संबंधी खरीद के लिए इस बार बजट की राशि काफी बढ़ायी गयी है। परन्तु खरीद में पारदर्शिता का कभी ख्याल नहीं रखा जाता। सेना प्रमुख को 14 करोड़ रुपये की घूस आफर करने का मामला गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई को रोकने में विफल तो साबित हो ही रही है, रेलवे में माल ढुलाई का भाड़ा बढ़ाकर महंगाई में और इजाफा करने में लगी है। जन वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की बजाय 'कैश सब्सिडी' की बात कर इसे बंद करने पर तुली है। 1993 से लेकर अबतक अवैध रूप से 289 कोल ब्लाक का आवंटन किया गया है। कैग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में 10.67 लाख करोड़ के राजस्व के नुकसान की बात कही है। श्री फैजी ने कहा कि इन प्रस्तावों पर अबतक 14 राज्यों के 17 प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे हैं। शुक्रवार को इन राजनीतिक प्रस्तावों पर अंतिम रूप से फैसला लिया जाएगा।

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